कहते हैं कि भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है और अगर वो भाषा हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक हो तो क्या कहना ! जी हाँ हम बात कर रहे हैं हमारी प्यारी हिंदी भाषा की I एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है बल्कि यह बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है जो हमारे पारम्परिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु भी है। भारत में ही लगभग 53 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिंदी है जिसमें 43.63% आबादी की पहली भाषा जबकि 13.9 करोड़ (11% से अधिक) लोगों की यह दूसरी भाषा है इन आंकड़ों से यह समझना आसान है कि भारत में लोगों के बीच संवाद का सबसे बेहतर माध्यम हिन्दी ही है शायद यही वजह रही होगी कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहते हुए साल 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात कही थी। परन्तु स्वतंत्रता के 76 साल बाद भी हिंदी राष्ट्रभाषा का दर्ज...
विश्व पर्यावरण दिवस वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और उसके विभिन्न घटकों के संरक्षण के लिए आयोजित किया जाने वाला सबसे बड़ा अभियान है, जिसका लक्ष्य पृथ्वी वासियों को पर्यावरण की महत्ता, वातावरण को स्वच्छ बनाना एवं उसके संरक्षण के लिए जागरूक बनाना है। यह हर वर्ष 5 जून को 100 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से 1972 में हुई थी I इस दिवस पर स्कूल, कॉलेज व अन्य स्थानों पर विभिन्न तरह की पर्यावरण संबंधी गतिविधियां जैसे निबंध, भाषण, क्विज, कला प्रतियोगिता, बैनर प्रदर्शन, नुक्कड़-नाटक, रैली आदि के जरिए लोगों को बृहद रूप से वृक्षारोपण, प्रकृति प्रेम, वृक्ष कटाई से रोकने के लिए जागरूक किया जाता है प्रकृति के प्रति सकारात्मक रवैये को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता हैI साथ ही साथ उन्हें आसपास को साफ सुथरा रखने, पानी की बचत, बिजली का कम उपयोग करने उसके जगह पर सौर उर्जा का उपयोग करने, जंगली जीवन की सुरक्षा आदि के लिए संकल्प भी दिलाया जाता है ताकि हमारी प्राकृतिक सुंदरता सदैव बर...