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Showing posts from October, 2022

भारत की एकता के सूत्रधार और आधार स्तंभ --- लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

जब किसी समाज में सारे व्यक्ति किसी निर्दिष्ट भौगोलिक सीमा के अन्दर अपने पारस्परिक भेद-भावों को भुलाकर सामूहीकरण की भावना से प्रेरित होते हुए एकता के सूत्र में बंध जाते हैं तो एक देश का निर्माण होता है I किसी भी  देश की स्थिरता को बनाए रखने में राष्ट्रीय एकीकरण की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता जिसके माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द  एवं  संपूर्ण विकास संभव होता  है। राष्ट्रीय एकीकरण न केवल  जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद आदि से लड़ता है अपितु राष्ट्र के प्रति वफादारी और भाईचारे की भावना में सुधार करने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता  है I इसी राष्ट्रीय एकता के बेजोड़ शिल्पी सरदार वल्लभभाई पटेल थे जिन्होंने अपनी संगठन कुशलता, राजनीति सत्ता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट निष्ठा के चलते  जिस अदम्य उत्साह एवं असीम शक्ति से नवजात गणराज्य की प्रारंभिक कठिनाइयों का समाधान किया, उसके कारण विश्व के राजनीतिक मानचित्र में उन्होंने अमिट स्थान बना लिया I देश की आजादी के संघर्ष में उन्होंने जितना योगदान दिया, उससे ज्यादा योगदान उन्होंने स्वतंत्र भारत को एक करने में दि...

आपदा प्रबंधन में पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण

 विश्व में पर्यावरण के स्तरों में गिरावट, मौसम में बदलाव और अनियोजित विकास में वृद्धि के कारण, आपदाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही  हैं। जिसके चलते पिछले कुछ वर्षों में  आपदा प्रबंधन को बहुत महत्व मिला है। विश्व के सर्वाधिक आपदा-संभावित देशों में से एक भारत में तो इसका महत्त्व और भी अधिक हो जाता है  जहाँ  प्रतिवर्ष बाढ़, भूस्खलन, सूखा और तूफान आने की आशंका के चलते नागरिकों का जागरूक रहना अति आवश्यक है । आपदा कभी किसी को बता कर नहीं आती ये तो  अचानक घटने वाली ऐसे  घटना है जिससे सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त होने के साथ साथ  जान-माल का इतना भारी नुकसान हो जाता है कि जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए विशेष सामजिक एवं आर्थिक व्यवस्था और सघन प्रयास की आवश्यकता होती है। ऐसी प्राकृतिक आपदाओं और विपत्तियों में कुशल आपदा प्रबंधन द्वारा हम  न केवल सँभलना सीखते  हैं अपितु  निश्चित रूप से उससे उत्पन्न प्रभावों को ज़रूर कम कर सकते  हैं। आपदाओं के कारण जानवरों और मनुष्यों के संभावित जीवन खतरे को कम करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण दिवस की शु...

कुल का गौरव, राष्ट्र की अनमोल धरोहर एवं सभ्य समाज की जननी –बेटियां

 बालिकाएं मानवता का वह हिस्सा हैं जो समाज में सभी सकारात्मकता की वाहक हैं,जिनकी मात्र उपस्थिति माहौल को स्वयं ही शिष्टता, सभ्यता और सुखदता से भर देती हैं। भारत एक ऐसा देश है जो अपनी संस्कृति, अपने रीति रिवाजों के लिये जाना जाता है। यहां के लोग अपनी धरती को अपनी मां के समान समझतेहुए उसे “भारत माता” के नाम से पुकारते हैं । बेटियों को सम्मान देने के मामले में यहां के लोग आज भी पीछे नहीं है। वे बेटियों को शक्ति का स्वरुप (गंगा, गीता, गायत्री, लक्ष्मी, सरस्वती) मानते हैं यहाँ बेटियां मानव कुल का गौरव, राष्ट्र की अनमोल धरोहर एवं सभ्य समाज की जननी कहलाती हैं। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. पहले जहां बेटियों के पैदा होने पर भी उन्हें बाल विवाह जैसे कुप्रथा में झोंक दिया जाता था, वहीं आज बेटी होने पर लोग गर्व करते हैं. तभी तो जो कल तक ये मानते थे कि बेटों से वंश चलता है़ वो भी आज की तारीख में मानने लगे हैं कि हमारी बेटियां भी इसमें अब पीछे नहीं रहीं। देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीं,कल्पना चावला, मेरिकॉम, पी टी उषा, पी वी सिन्धु, या फिर इंदिरा नुई...