आजकल पूरे भारत में मानसून अपने चरम पर है और ऐसे में स्वाभाविक है कि इस समय वर्षा होगी ही चाहे कहीं कम हो या कहीं ज्यादा। जहां ज्यादा वर्षा होगी वहां बाढ़ के साथ साथ भूस्खलन का खतरा भी मंडराएगा और इस भयावह परिस्थिति से आये दिन हिमाचल वासियों को जूझना पड़ता है क्यूंकि यहाँ की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहाँ मानसून के दौरान भूस्खलन बार-बार आते हैं। जिनसे न केवल जान माल का भारी नुक्सान होता है बल्कि बाढ़ की समस्या भी उत्पन्न होती हैं। अगर हम पिछले कुछ वर्षों का आंकड़ा देखें तो अनुचित वनों की कटाई, सड़क काटने, अत्याधिक भवन निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण इसमें काफी उछाल आया है मानसून के दौरान शिवालिक और निचले व मध्य पर्वत श्रृंखला में भारी बारिश के कारण ब्यास, रावी, सतलुज तथा चंद्रभागा नदी घाटियों के ऊंचाई के क्षेत्रों की मुख्य समस्या अचानक आने वाली बाढ़ तथा नदियों की ऊंच़ी ढलानों में भारी बारिश के चलते भूमि कटाव एवं नदियों का तेज प्रवाह है। अक्सर बादल फटने के कारण आने वाली बाढ़, ग्लेशियर झील का फटना और भूस्खलन के कारण अस्थ...