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Showing posts from November, 2022

विश्व एड्स दिवस : यौनिकता को युवाओं की शिक्षा का हिस्सा बनाना अनिवार्य

 मौजूदा समय में दुनिया का हर देश विकास की दौड़ में भाग रहा है और इस दौड़ में अपना देश भी कहीं पीछे नहीं है| लेकिन जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू होते है,उसी तर्ज पर अपने देश के इस विकास के भी दो पहलू है एक तरफ तो हम तकनीकी और विज्ञान क्षेत्र में आगे बढ़ रहे है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य के ग्राफ में लगातार गिरते जा रहे है नतीजन कई तरह की जानलेवा बीमारियों ने अपने देश को घेर रखा है जिसमें एचआईवी और एड्स एक प्रमुख बीमारी है | भारत में इस वक़्त करीब इक्कीस लाख लोग एचआईवी से पीड़ित है जोकि विश्व में तीसरे स्थान पर है|दुनिया में कहीं न कहीं एचआईवी/एड्स के कारण हर मिनट एक की मौत हो रही है। यह जानकारी यूनाइटेड नेशंस प्रोग्राम ऑन एचआईवी /एड्स (यूएनएड्स) द्वारा जारी नई रिपोर्ट ‘इन डेंजर: ग्लोबल एड्स अपडेट 2022’ में सामने आई है इस रिपोर्ट में जो आंकड़े साझा किए हैं उनके अनुसार अकेले 2021 में एचआईवी संक्रमण के 15 लाख नए मरीज सामने आए थे। वहीं 6.5 लाख लोगों को एड्स की वजह से असमय जान से हाथ धोना पड़ा था। इसका मतलब है कि इस बीमारी के हर रोज 4,000 नए मामले सामने सामने आ रहे हैं, जबकि हर रोज 1...

संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक माध्यम है - डॉ. भीमराव अंबेडकर

 किसी भी देश को चलाने के लिए संविधान जरूरी है। यह न केवल सरकार की रचना करने  में सहायक है बल्कि मनमाने  शासन को रोकने में अत्यंत भी अपनी अहम भूमिका निभाता है यह   सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ साथ  उनके मौलिक कर्तव्यों के बारे में भी बताता है। सत्ता में बैठे लोग जिनका मकसद जनता की सेवा करना है, वे संविधान के प्रति जवाबदेह हैं, जबकि इसकी रक्षा के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय को अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में संविधान दिवस के  बारे में जानना हर नागरिक के लिए  बेहद ज़रूरी है क्यूंकि  समाज में आज भी ऐसे कई वर्ग हैं, जो संविधान में दिए नागरिक अधिकारों से अनजान है। इसलिए   जरूरत है कि ये लोग अपने संविधान के बारे में जानें और अपने अधिकारों की बात करें, ताकि हम समान तरीके से आगे बढ़ें और असमानता को दूर किया जा सके। भारतीय लोकतंत्र में आज का दिन जितना पावन है, उतना ही महत्वपूर्ण भी। हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की आत्मा अगर किसी को कहा जा सकता है तो वो हमारा संविधान है। इस आत्मा रूपी   लिखित ग्रंथ को  वैसे तो 26 जनवर...