Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2022

विश्व पृथ्वी दिवस -आओ धरती माँ का क़र्ज़ उतारें

        हमारा देश ऋषि मुनियों और संतों का देश है जिन्होंने लोगों को कल्याण का मार्ग दिखाया। होली हो या दिवाली अथवा महापुरुषों की जयंती या कोई अंतर्राष्ट्रीय दिवस सब का निचोड़ एक ही है जिओ और जीने दो। वैसे तो ऐसे कई तरीके हैं जिससे हम अकेले या सामूहिक तौर पर पृथ्वी को बचने में अपना महत्वपूर्ण  योगदान दे सकते हैं और इसके लिए हमें हर दिन   पृथ्वी दिवस मनाते हुए इसके सरंक्षण के लिए कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए  ताकि  पृथ्वी साफ सुथरी हो और  मानव सुखपूर्वक पृथ्वी पर अपना जीवन यापन कर सके। हमारे लिए यह पृथ्वी ही भगवान है क्यूंकि  प्रत्येक जीव धरती माता पर ही निर्भर है। ये धरती माता ही हैं , जो हमें अन्न , जल , फल-फूल , पेड़-पौधे , पहाड़ , नदियां , झरने का सुख देती हैं। धरती की कृपा से ही जीवों का जीवन चलता है। यही कारण है कि हम  हजारों साल से धरती माता की पूजा करते आ रहे हैं । पृथ्वी संरक्षित होगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित होगा। लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से प्रथमतः पूरे विश्व में 22 अप्रैल 1970 को पृथ्वी दिव...

बदलाव की असीम संभावनाओं से भरे हैं सरकारी स्कूल

 यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) की 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल 15,07,708 स्कूल हैं, जिनमें से 10,32,570 स्कूल केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित किये जा रहे हैं, 84,362 सरकारी सहायता प्राप्त हैं, 3,37,499 गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल हैं, जबकि 53,277 स्कूलों का संचालन अन्य संगठनों एवं संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। भारत की आबादी का 75% हिस्सा मध्यवर्गी परिवारों  से है जो आज के निजि स्कूलों का शुल्क देने में असमर्थ है। सरकारी स्कूलों का शुल्क कोई भी गरीब परिवार बहुत ही आसानी से उठा सकता है। बच्चों को स्कूल में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा क़ानून, 2009 के अनुसार सारी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। सरकारी स्कूलों में किताबें और यूनिफॉर्म भी मुफ़्त दिए जाते हैं जिससे अभिभावकों को आर्थिक रूप से काफ़ी सहूलियत मिलती है। सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था से बच्चों के स्वास्थ्य का भी विशेष ख्याल रखा जाता है। सरकारी स्कूलों के प्रति हमारा नज़रिया कैसा है? इनके  बारे में अच्छा क्या है? हम वहाँ पढ़ने वाले बच्चों ...