हमारा देश ऋषि मुनियों और संतों का देश है जिन्होंने लोगों को कल्याण का मार्ग दिखाया। होली हो या दिवाली अथवा महापुरुषों की जयंती या कोई अंतर्राष्ट्रीय दिवस सब का निचोड़ एक ही है जिओ और जीने दो। वैसे तो ऐसे कई तरीके हैं जिससे हम अकेले या सामूहिक तौर पर पृथ्वी को बचने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं और इसके लिए हमें हर दिन पृथ्वी दिवस मनाते हुए इसके सरंक्षण के लिए कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए ताकि पृथ्वी साफ सुथरी हो और मानव सुखपूर्वक पृथ्वी पर अपना जीवन यापन कर सके। हमारे लिए यह पृथ्वी ही भगवान है क्यूंकि प्रत्येक जीव धरती माता पर ही निर्भर है। ये धरती माता ही हैं , जो हमें अन्न , जल , फल-फूल , पेड़-पौधे , पहाड़ , नदियां , झरने का सुख देती हैं। धरती की कृपा से ही जीवों का जीवन चलता है। यही कारण है कि हम हजारों साल से धरती माता की पूजा करते आ रहे हैं । पृथ्वी संरक्षित होगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित होगा। लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से प्रथमतः पूरे विश्व में 22 अप्रैल 1970 को पृथ्वी दिव...