पश्चिमी देश हमेशा से हम भारतीयों को विशेषकर युवाओं को अपनी पाश्चात्य संस्कृति ,सभ्यता और उन्नति के चलते आकर्षित करते रहे हैं इस भागमभाग में वे अपनी मूल्यों पर आधारित भारतीय संस्कृति को छोड़ने में भी गुरेज नहीं करते हैं नशाखोरी भी इसी का उदाहरण है जोकि आज भारत देश की बड़ी मुख्य समस्याओं में से एक बन चुकी है I नशा एक ऐसी समस्या है, जिससे नशा करने वाले के साथ साथ, उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है और अगर परिवार बर्बाद होगा तो समाज नहीं रहेगा, समाज नहीं रहेगा तो देश भी बिखरता चला जायेगा I देश के लोगो को नशे से मुक्ति के लिए जागरूक करने व देश के युवा वर्ग को उनकी जिम्मेदारी का अहसास करने के लिए हर साल देश में 31 मई को तंबाकू मुक्ति दिवस व विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है Iअगर हम नशे के प्रकारों की बात करें तो शराब, सिगरेट, अफीम, गांजा, हेरोइन, कोकीन, चरस और चिट्टा मुख्य है जिसकी लत अगर किसी इन्सान को पड़ जाये तो न केवल उसे दीमक की तरह अंदर से खोखला बना देती है बल्कि शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से भी...