विश्व पर्यावरण दिवस वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और उसके विभिन्न घटकों के संरक्षण के लिए आयोजित किया जाने वाला सबसे बड़ा अभियान है, जिसका लक्ष्य पृथ्वी वासियों को पर्यावरण की महत्ता, वातावरण को स्वच्छ बनाना एवं उसके संरक्षण के लिए जागरूक बनाना है। यह हर वर्ष 5 जून को 100 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से 1972 में हुई थी I इस दिवस पर स्कूल, कॉलेज व अन्य स्थानों पर विभिन्न तरह की पर्यावरण संबंधी गतिविधियां जैसे निबंध, भाषण, क्विज, कला प्रतियोगिता, बैनर प्रदर्शन, नुक्कड़-नाटक, रैली आदि के जरिए लोगों को बृहद रूप से वृक्षारोपण, प्रकृति प्रेम, वृक्ष कटाई से रोकने के लिए जागरूक किया जाता है प्रकृति के प्रति सकारात्मक रवैये को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता हैI साथ ही साथ उन्हें आसपास को साफ सुथरा रखने, पानी की बचत, बिजली का कम उपयोग करने उसके जगह पर सौर उर्जा का उपयोग करने, जंगली जीवन की सुरक्षा आदि के लिए संकल्प भी दिलाया जाता है ताकि हमारी प्राकृतिक सुंदरता सदैव बरकरार रहे लेकिन इस सुन्दरता पर सबसे बड़ा ग्रहण प्लास्टिक का कचरा लगा रहा है जिससे पूरी दुनिया परेशान है I नदियां, पहाड़,द्वीप या मैदान, हर जगह प्लास्टिक के कचरे से प्रदूषण और पर्यावरण को भारी नुक़सान हो रहा है इसी ज्वलंत समस्या के मद्देनजर इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम 'प्लास्टिक प्रदूषण का समाधान' रखी गई है, जिसका उद्देश्य प्रकृति को प्लास्टिपक मुक्त बनाना और पर्यावरण को बचाना है इस वक़्त पर्यावरण का संकट हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती के रुप में उभर रहा है I संरक्षण के लिए अब तक बने सारे कानून और नियम सिर्फ किताबी साबित हो रहे हैं I प्लास्टिक कचरे का बढ़ता अंबार मानवीय सभ्यता के लिए सबसे बड़े संकट के रुप में उभर रहा है. हालाँकि भारत में प्लास्टिक का प्रवेश लगभग 60 के दशक में हुआ परन्तु आज यह पहाड़ के शक्ल में बदल गया है जिसने धरती के साथ साथ महासागरों पर भी अपना कब्जा कर लिया है वैज्ञानिकों का मत है कि प्लास्टिक का बढ़ता यह कचरा प्रशांत महासागर में प्लास्टिक सूप की शक्ल ले रहा है जिसके अनुमानित 5,000 अरब टुकड़े पानी में तैर रहे हैं और अधिक वक्त बीतने के बाद यह टुकड़े माइक्रो प्लास्टिक में तब्दील हो गए हैं I जीव विज्ञानियों के अनुसार समुद्र तल पर तैरने वाला यह भाग कुल प्लास्टिक का सिर्फ एक फीसदी है जबकि 99 फीसदी समुद्री जीवों के पेट में है या फिर समुद्र तल में छुपा है I अब ज़रा सोचिए, स्थिति कितनी भयावह है I आमजन की बढ़ती फ़िक्र देखकर कई देशों की सरकारें और कंपनियां प्लास्टिक के बेतहाशा इस्तेमाल को रोकने के लिए कई क़दम उठा रही हैं , पर बड़ा सवाल ये है कि आज हमें जिस तरह प्लास्टिक की लत लग गई है, उसमें बुनियादी तौर पर बदलाव कैसे लाया जा सकता है? यह बात इतनी आसान नहीं है कि प्लास्टिक ख़राब चीज़ है, तो चलो उसकी जगह कुछ और इस्तेमाल करते हैं I इससे पीछा छुड़ाने के लिए हमें अपनी आदतें बदलने के साथ अपनी सोच भी बदलनी पड़ेगी I आज बहुत सी कंपनियां ऐसा प्लास्टिक बना रही हैं, जो क़ुदरती तौर पर ख़ुद ही नष्ट हो जाएगा इस बायोप्लास्टिक को बनाने में स्टार्च या प्रोटीन का इस्तेमाल होता है I हालांकि ये पूरी तरह से जैविक प्लास्टिक नहीं हैं फिर भी काफ़ी हद तक ये पर्यावरण में घुलने मिलने के लिहाज़ से बेहतर विकल्प लगता है Iहम जानते हैं कि हानिकारक प्लास्टिक की चीजों का जीवन में बेतहाशा उपयोग हमारे शरीर के आंतरिक अंगों पर जानलेवा प्रभाव डालता है और कैंसर का एक प्रमुख कारण बनता है। घर के फर्नीचर, रसोई के बर्तन , कप, प्याली, गिलास, थालियों, पानी के घड़ों और पानी की बोतलों से लेकर, दवाओं सी शीशियां सब कुछ में हम प्लास्टिक के विकल्प अपनाते हैं और कभी सोचते नहीं कि अनजाने में हमारे पेट में, फेफड़ों में, किडनी तक में प्लास्टिक के सूक्ष्म कण कितनी बड़ी मात्रा में पहुंच रहे हैं जो हमारे शरीर के लिए धीमे जहर की तरह हैं। वैसे भी हमने पर्यावरण को बर्बाद करने वाले सभी तौर तरीकों को अपना लिया है । चाहे वह जंगल काटने का मसला हो या खाद्य पदार्थ में कीटनाशकों और उर्वरकों का घुलता जहर। प्लास्टिक भी हमारे जीवन के किसी भी हिस्से से अछूता नहीं है। हम कुदरत द्वारा दिए गए संसाधनों को दरकिनार कर प्लास्टिक या इसके जैसे अन्य उत्पादों को अपने जीवन का अंग बनाते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हम खुद को प्लास्टिक के कफन में दफन कर लेंगे। अत: आज हमें सबसे ज्यादा जरूरत है पर्यावरण संकट के मुद्दे पर आम जनता को जागरूक करने की। पर्यावरणीय समस्याएं जैसे प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन इत्यादि मनुष्य को अपनी जीवनशैली के बारे में पुनर्विचार के लिए प्रेरित कर रही हैं तो आइए इस पर्यावरण दिवस पर संकल्प करें कि हम ना ही पर्यावरण और प्रकृति के खिलाफ कोई भी कार्य करेंगे, बल्कि अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर तथा लोगों में जागरूकता फैला कर पर्यावरण को बचाएंगे और एक इको फ्रेंडली पर्यावरण का निर्माण करके एक अच्छे भविष्य का निर्माण करेंगे।
जैसे की हम जानते ही हैं कि शिक्षा व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए बहुत आवश्यक है। इसलिए ये ज़रूरी है की शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए वक्त के साथ शिक्षा नीति में भी बदलाव किया जाता रहे और कहते हैं कि जीवन बदलाव का नियम है और यदि यह बदलाव सकारात्मक है, तो यह जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। जिस तरह से एक जगह रुका हुआ पानी बदबू मारने लगता है उसी तरह से एक पुरानी पद्धति चाहे वो शिक्षा व्यवस्था से ही सम्बंधित हो, से भी पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है इसी सकारात्मक बदलाव की और अग्रसर होते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करके शिक्षा के नवीनीकरण की ओर पहल की है जो कि निःसंदेह एक सराहनीय कदम है, जो बच्चो के मानसिक विकास को बढ़ावा देगा साथ ही अब यह विषयो को रटने की पद्धिति का त्याग कर उसे समझने के सिद्धांत पर कार्य करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर...
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