परीक्षाएं दस्तक दे चुकी हैं और यह वक्त है पढ़ी हुई चीजों को दोहराने का । परीक्षा के दिन नजदीक आते ही बच्चों को सौम्य और उच्च, ये दो प्रकार के तनाव हो सकते है। एक रिसर्च के अनुसार, कम तनाव से बच्चा परीक्षा के लिए अच्छे से तैयारी करने के लिए प्रेरित होता है। वहीं, ज्यादा तनाव होने पर चिंता और अवसाद की समस्या हो सकती है। बच्चे हंसते-खेलते ही अच्छे लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आने लगती है, उनके चेहरे पर तनाव दिखने लगता है। परीक्षाओं के लिए तैयार हो रहे विद्यार्थियों का तनाव में रहना आम बात है। परिस्थितियों की वजह से छात्रों में तनाव बढ़ता है। इस कारण खराब परिणाम सामने आते हैं। कुछ अभिभावक अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने हेतु बच्चों पर इतना दबाव दे देते हैं कि जिससे उबरना कई बार मुश्किल हो जाता है। कई बार अभिभावकों द्वारा बच्चों की आपसी तुलना से भी बच्चों पर अधिक से अधिक अंक लाने का दबाव रहता है,परिणामस्वरूप वे तनावग्रस्त हो जाते हैं। इसके अलावा कक्षाओं में स्थान बरकरार रखने के चक्कर में, फेल होने और शर्मिंदगी का डर या बच्चे को खुद से ज्यादा अपे...