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Showing posts from September, 2023

आखिर कब हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का बापू का सपना पूरा होगा

कहते  हैं कि भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है और अगर वो भाषा हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक हो तो क्या कहना ! जी हाँ हम बात कर रहे हैं हमारी प्यारी हिंदी भाषा की I  एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है बल्कि यह बहुत सरल,  सहज और सुगम भाषा होने के साथ विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है जो हमारे पारम्‍परिक ज्ञान, प्राचीन सभ्‍यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक महत्वपूर्ण  सेतु भी है। भारत में ही लगभग 53 करोड़ लोगों की  मातृभाषा हिंदी है जिसमें  43.63% आबादी की पहली भाषा जबकि  13.9 करोड़ (11% से अधिक) लोगों की यह दूसरी भाषा है इन आंकड़ों से यह समझना आसान है कि भारत में लोगों के बीच संवाद का सबसे बेहतर माध्यम हिन्दी ही है शायद यही वजह रही होगी  कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहते हुए  साल 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात कही थी। परन्तु स्वतंत्रता  के 76 साल बाद भी  हिंदी राष्ट्रभाषा का दर्ज...