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मानव स्वभाव के तीन महान गुणों के प्रतीक - गांधी जी के तीन बन्दर

भारत केवल संतों, महापुरूषों और देशभक्तों की जन्मभूमि ही नहीं  है बल्कि  विलक्षण प्रतिभा के धनी लोगों की कर्मभूमि भी है। जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था तो भारत को आज़ाद करवाने में देश के कोने कोने से  प्रत्येक वर्ग के बच्चों,युवाओं और बुजुर्गों ने अपने अपने तरीके से योगदान दिया जिनकी वजह से देश स्वतंत्र हुआI इस आजादी आन्दोलन के सबसे बड़े महानायक  थे मोहनदास करमचंद  गांधी जी, जिनका जन्म दिन  प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को  भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वे सत्याग्रह के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे,उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धांत पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता के प्रति आन्दोलन के लिए प्रेरित किया I उन्हें दुनिया महात्मा गाँधी के नाम से जानती है कुछ इतिहासकारों के  मतानुसार  उन्हें  यह संबोधन सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालीदास ने दिया था जिसका अर्थ  संस्कृत भाषा में सम्मान सूचक शब्द महान आत्मा से है I उन्हें  लोग प्रेम और सम्मानपूर्वक बापू जिसका अर्थ गुजराती में पिता है से भी पुकारते हैं जबकि सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गाँधी जी के नाम जारी प्रसारण में  उन्हें  राष्ट्रपिता कहकर संबोधित करते हुए आजाद हिन्द फौज के सैनिकों के लिए उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएं मांगी थीं I जैसा  कि सर्वविदित है, कर्म का धर्म और जीवन से  सीधा रिश्ता है और यही कारण है कि हमारे सभी ग्रंथों से भी हमें यही शिक्षा  मिलती है कि सद्कर्म किए जाएं। हमारे महापुरुषों का भी  यह कहना है कि  बुरे काम का हमेशा  बुरा नतीजा होता है । गांधी जी ने भारतीय दर्शन, धर्म और अध्यात्म की इस भावना को और अधिक विस्तार देते हुए  बुरा न करने के साथ-साथ, बुरा न देखने और बुरा न सुनने की बात भी कही । गांधी जी ने अपनी इस बात को तीन बंदरों के प्रतीक से समझाया है जो कि  इतने आम हैं कि उनका नाम आते ही अपने हाथ से आंख, मुंह और कान बंद किए एक कतार में बैठे तीन बंदरों का बिंब हमारी आंखों के सामने स्वत: ही तैरने लगता है। 

राष्ट्रपिता के इन विचारों का वैज्ञानिक आधार भी है जो बताता है कि गलत विचार कहना, सुनना और बोलना किस तरह हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत पर असर करता  हैं। अगर हमें गाँधी जी के विचारों को गहराई से जानना है  तो इन तीन बंदरों के बारे में भी जानना  चाहिए जिन्हें  चीन के एक प्रतिनिधिमंडल ने गाँधी जी को  भेंट किया था I इन तीन बंदरों का सबसे ज्यादा जिक्र जापानी संस्कृति में मिलता है जहाँ शिंटो सम्प्रदाय इन तीन बंदरों के समूह को बहुत पवित्र मानता है इनकी संस्कृति में इनको मिज़ारू,किकाजारु और इवाजारु कहा जाता है इन तीनों को  संयुक्त रूप से समविकी सारु कहा जाता है, जो जापान में पथ के देवता  ” कोशिन” के सेवक माने जाते हैं। गांधी जी ने जीवन और समाज पथ के लिए जब इन तीनों बंदरों को प्रतीक के रूप में चुना होगा तब नि:संदेह उनके मन  में ये तीनों बंदर जीवन पथ के देवता के रूप में ही उभरे होंगे। उन्हें लगा होगा कि अगर आदमी बुरा बोलना, बुरा देखना और बुरा सुनना बंद कर दे तो समाज और जीवन बहुत सुंदर होने के साथ-साथ एक अच्छे और अद्भुत पथ पर अग्रसर हो सकता है। परन्तु वर्तमान में इनकी प्रासंगिकता पर नजर डालें तो आज भी पहले बन्दर के माध्यम से बुरा न देखने की जो शिक्षा दी गई है उसे दरकिनार करते युवा पीढ़ी मोबाइल पर  यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्वीटर और फेसबुक पर अश्लीलता  देखते हुए स्वयं बर्बाद हो रही है। दूसरे बन्दर के सन्देश को अगर हम समझे तो  हमें बुरा नहीं सुनना चाहिए। लेकिन चारों ओर झूठ परोसा जा रहा है जिसे बार बार सुनने से सत्य का आभास होता है इसलिए हमें अच्छी संगत के साथ साथ सात्विक विचारों  को सुनना चाहिए। इसी प्रकार   तीसरे बन्दर द्वारा  दोनों हाथों को अपने मुँह पर रखने का  अर्थ है कि किसी को भी अपशब्द, निंदा या झूठ नहीं कहना चाहिए परन्तु इन्सान अपने स्वार्थ में इतना अँधा हो चुका है कि दूसरों की निंदा करना , झूठ बोलना उसकी दिनचर्या में अभिन्न अंग बन चुका है I  अब ये तीन बंदरों वाला दर्शनशास्त्र  चाहे कहीं से भी आया हो लेकिन हम भारतीयों के लिए यह गाँधी जी का मूलभूत दर्शनशास्त्र  है हालाँकि बदलते ज़माने में अब ये तीन बन्दर मात्र हंसी मजाक के पात्र रह गए हैं गाँधी जी के इस संसार से विदा लेने के बाद यह दर्शनशास्त्र   केवल किताबों तक ही सीमित हो गया है कोई भी इसे अपने जीवन में उतारने की कोशिश नहीं करता I इसलिए आज जरूरत है ऐसे नागरिकों  की जो इन तीन बंदरों द्वारा प्रदर्शित संदेशों की प्रासंगकिता को समझें  और एक स्वच्छ समाज का निर्माण कर सकें  I


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