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समाज सेवा का सशक्त माध्यम- राष्ट्रीय सेवा योजना

  किसी राष्ट्र के निर्माण में युवाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है। आज देश में तकरीबन 65 प्रतिशत  जनसंख्या युवा है। इस मद्देनजर यह देश के लिए सौभाग्य की बात है कि देश का चौमुखी विकास एकसाथ हो सकता है। इसके लिए आजादी के समय गांधी जी ने युवाओं को राष्ट्रीय सेवा से जोड़ने पर विशेष बल दिया था। आज राष्ट्रीय सेवा योजना समाज सेवा का सशक्त माध्यम बन चुका है। हर साल की तरह 24 सितंबर को राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस मनाया जा रहा है।स्वैच्छिक समुदाय सेवा के माध्यम से युवा छात्रों के व्यक्तित्व, राष्ट्र सेवा के लिए उन्हें जागरूक बनाने  और चरित्र के विकास के प्राथमिक उद्देश्य से राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) को 1969 में शुरू किया गया था। राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रमुख लक्ष्य समाज सेवा के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समुचित विकास करना है । इससे देश का युवा वर्ग जन-कल्याण की भावना से राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ता है । युवा शक्ति का सदुपयोग योजनाबद्ध तरीके से करके रचनात्मक कार्यों को अंजाम देना इसका उद्देश्य है। साधारण शब्दों में यह योजना मुख्य रूप से भटके हुए लक्ष्यविहीन युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक और जन-कल्याणकारी कार्यों की दिशा में मोड़ती है तथा शैक्षिक बातों को यथार्थ से जोड़कर युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा हेतु अभिप्रेरित करती है । प्रत्येक एनएसएस स्वयंसेवी को प्रति वर्ष कम से कम 120 घंटे अर्थात दो साल में 240 घंटे की सेवा करना अनिवार्य होता है। यह कार्य एनएसएस शाखाओं द्वारा अपनाए गए गांवों या स्कूल परिसरों में किया जाता है। आमतौर पर अध्ययन के घंटों के बाद इसे सप्ताहांत अथवा छुट्टियों के दौरान किया जाता है। इसके अलावा, प्रत्येक एनएसएस इकाई स्थानीय समुदायों को शामिल करके कुछ विशेष परियोजनाओं के साथ छुट्टियों  में अपनाए गए गांवों या पाठशाला  में 7 दिनों की अवधि के विशेष शिविरों का आयोजन करती है। प्रत्येक स्वयंसेवक को 2-वर्ष की अवधि के दौरान एक बार विशेष शिविर में भाग लेना जरूरी होता है। इस प्रकार, एक इकाई से लगभग 50 प्रतिशत एनएसएस स्वयंसेवी विशेष शिविर में भाग लेते हैं। एनएसएस का प्रतीक चिन्ह विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के विशाल रथ चक्र से प्रेरित है। पहिया समय और स्थान में जीवन की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है। पहिए की आठ छड़ें दिन के 24 घंटे दर्शाती हैं। लाल रंग बताता है कि स्वयंसेवक युवा रक्त से भरा है जो जीवंत, सक्रिय, उत्साही और उत्साही है। गहरा नीला रंग ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें से एनएसएस एक छोटा सा हिस्सा है।

राष्ट्रीय सेवा योजना का ध्येय वाक्य है, “मैं नहीं आप” जिसके माध्यम से स्वयं सेवक प्रजातान्त्रिक ढंग से निःस्वार्थ सेवा की आवश्यकता का समर्थन करता है। हमें सभी मनुष्यों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि मानवता की सेवा की जा सके। इसके माध्यम से युवा समस्या का समाधान खोजने की दिशा में अपने ज्ञान और अनुभव का प्रयोग करने का अभ्यस्त होता है, जिससे युवा शक्ति के सुदृढ़ होने के साथ ही राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को प्रोत्साहन प्राप्त होता है ।राष्ट्रीय सेवा योजना स्वतंत्रता के पश्चात् युवा पीढ़ी को राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ जोड़ने का एक सर्वोत्तम एवं सफल प्रयास है । इसके माध्यम से युवा वर्ग ने अपने खोए हुए आत्मविश्वास और शक्ति को पहचाना है । वर्तमान परिदृश्य में बेरोजगारी की मार से त्रस्त युवा वर्ग आत्महत्या और कई सामाजिक अपराधों की विसंगतियों से बचने में सफल हुआ है । वस्तुत: यह योजना कर्म के महत्व को प्रदर्शित करके युवा पीढ़ी को स्वावलम्बन की दिशा की ओर अग्रसर करती है ।हमें इस युवा  शक्ति की सकारात्मक ऊर्जा का संतुलित उपयोग करना होगा और  यदि हम इस युवा शक्ति का सकारात्मक उपयोग करेंगे तो विश्व गुरु ही नहीं अपितु विश्व का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा के रूप में भी जाने जाएंगे l

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