हमारा देश प्रगति के मार्ग पर है और इसमें इंटरनेट का महत्व बहुत अधिक है अब हर काम को घर से ही इंटरनेट के जरिए किया जा सकता है फिर हमारा सामाजिक क्रिया-कलाप इसमें पीछे कैसे रह सकता है । सोशल मीडिया के आगमन से हम देश-विदेश के लोगों से जुड़ गए हैं ।आजकल जहाँ सोशल मीडिया बहुत ही सार्थक लगने लगा है तो वहीं इसके दुष्परिणाम भी बहुत सामने आ रहे हैं । चूंकि सोशल मीडिया हमें देश-विदेश से जोड़ रहा है । इसलिए हमारी संस्कृति पर विदेशी प्रभाव पड़ता जा रहा है ।खास कर बच्चे और युवा वर्ग विदेशी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं । जिससे उनके विचार, व्यवहार, पहनावे-ओढ़ावे में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है । आज युवा पैसा कमाने के लिए गलत तरीके अपनाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं आज सोशल मीडिया का दुरूपयोग एक ऐसा ज्वलंत मुद्दा बन चुका है जो कि एक नासूर की तरह समाज और संस्कृति को खोखला करता जा रहा है जहां ना रिश्तों की परवाह है , ना किसी की इज्जत की I चंडीगढ़ की एक निजि विश्व-विद्यालय में हुआ प्रकरण भी भविष्य के ऐसे भयावह समाज का आईना दिखा रहा है I जब से स्मार्ट फोन का चलन बढ़ा है, तब से रिश्तों में दूरियां भी बढऩे लगी हैं, क्योंकि अब हर किसी का अधिकतर समय मोबाइल पर बीतने लगा है। कभी स्वयं को अपडेट रखने के नाम पर, तो कभी सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस देखने के लिए युवाओं से लेकर बड़े तक मोबाइल पर इस कद्र व्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें दूर-दराज के लोगों से बात करने की तो फुर्सत है, परंतु साथ रहते मां-बाप, पति-पत्नी, बच्चों या भाई बहनों के पास बैठकर उनसे बात करने का समय नहीं है। यह ऐसी स्थिति है, जिससे कोई चाहकर भी नहीं निकल पाता I पहले के दौर में जब मोबाइल नहीं था, तो लोगों का आपस में काफी मिलना-जुलना होता था। संवाद का सिलसिला चलता रहता था। लोग एक- दूसरे के दर्द और भावना को समझते थे। साथ ही समस्याओं के निपटारे के लिए प्रयास करते थे। अब मोबाइल के आगमन के बाद बातें तो काफी हो रही हैं, लेकिन दिलों के बीच की दूरियां काफी बढ़ गई हैं। लोगों के बीच उचित संवाद नहीं हो पा रहा है। व्यक्तिगत समस्याओं का जाल बढ़ रहा है और रिश्तों की बुनियाद कमजोर पड़ती जा रही है। ऐसे में रिश्ते बन कम रहे हैं और टूट ज्यादा रहे हैं। हालाँकि इसमें भी कोई शक नहीं है कि हम सबको व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों से बाहरी दुनिया से जुड़े रहने के लिए मोबाइल फोन की आवश्यकता है। लेकिन जरूरी कार्यो को रोककर अपना और दूसरे का समय खराब करने की कीमत पर नहीं। हम सब मोबाइल के साथ रहना पसंद करते हैं, इतना कि सोने से पहले वाट्स एप पर मैसेज चेक करते हैं और उठते ही फिर सबसे पहले मैसेज पढ़ते हैं। इससे लोग वर्चुअल वर्ल्ड में ज्यादा जीने लगे हैं। परिवार में आजकल आमने-सामने बैठकर बातें करना भी कम हो गया है I दूसरों को नजर अंदाज करके अपने सेलफोन में व्यस्त रहने से रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जहाँ तक बच्चों की बात है तो वे घर में मोबाइल में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। बहुत बोलने पर कुछ वक्त वह साथ में बिता लेते हैं। ज्यादातर खाने के वक्त भी बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मोबाइल की लत के पीछे ठोस वजह यह है कि उनके जीवन में महत्वपूर्ण लक्ष्यों का अभाव है। वे जीवन के लिए जरूरी शिक्षा से दूर होते जाते हैं और मोबाइल फोन के माध्यम से सस्ते मनोरंजन और उसकी लत में लग जाते हैं। इसके चंगुल से निकलने के लिए पहली आवश्यकता यह है कि आप अपने जीवन को ज्यादा दिलचस्प और सार्थक बनाएं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि टेक्नोलॉजी से निजी जिंदगी में बहुत लाभ हैं पर नुक्सान भी अधिक झेलने पड़ते हैं क्योंकि हम दुनिया के करीब और अपने रिश्तों से दूर होते जा रहे हैं । यदि इससे छुटकारा न पाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब हम अपने रिश्तों से पूरी तरह दूर होकर अकेले रह जाएंगे। इसलिए अपने आप भी मोबाइल का उपयोग कम करें और बच्चों के साथ समय व्यतीत करें ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके Iआज जरूरत है कि समाज इस उपकरण की उपयोगिता को समझें और समय और रिश्तों की कीमत पर उसके व्यर्थ इस्तेमाल से बचें ताकि अनजाने हाथ से फिसलती खुशियों को थाम सकें और एक सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकें l
जैसे की हम जानते ही हैं कि शिक्षा व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए बहुत आवश्यक है। इसलिए ये ज़रूरी है की शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए वक्त के साथ शिक्षा नीति में भी बदलाव किया जाता रहे और कहते हैं कि जीवन बदलाव का नियम है और यदि यह बदलाव सकारात्मक है, तो यह जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। जिस तरह से एक जगह रुका हुआ पानी बदबू मारने लगता है उसी तरह से एक पुरानी पद्धति चाहे वो शिक्षा व्यवस्था से ही सम्बंधित हो, से भी पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है इसी सकारात्मक बदलाव की और अग्रसर होते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करके शिक्षा के नवीनीकरण की ओर पहल की है जो कि निःसंदेह एक सराहनीय कदम है, जो बच्चो के मानसिक विकास को बढ़ावा देगा साथ ही अब यह विषयो को रटने की पद्धिति का त्याग कर उसे समझने के सिद्धांत पर कार्य करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर...
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