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देश व समाज के शिल्पकार - शिक्षक

शिक्षक, शिक्षण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है। शिक्षक के बिना शिक्षा की प्रक्रिया सफल रुप से नहीं चल सकती। हमारे देश में शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति का उदय हुआ है उसमें शिक्षकों का विशेष योगदान है। गुरु-शिष्य परंपरा तो हमारी संस्कृति की पहचान है। हमारे देश में शिक्षक अर्थात गुरु को तो भगवान से भी बढ़ कर बताया गया है। 

शिक्षक की क्रिया और व्यवहार का प्रभाव उसके विद्यार्थियों,विद्यालय और समाज पर पड़ता है।इस दृष्टि से कहा जाता है कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। चाणक्य ने कहा था- ‘ शिक्षक कभी साधारण नहीं होता । प्रलय व उत्पत्ति दोनों उसकी गोद में पलते हैं ' और ये बात आज भी उतनी ही सच है । ये शिक्षा ही है जो सही दिशा में मिले तो मनुष्य को देवता बना देती है और गलत दिशा में मिले तो दानव l 

अगर हम भारत के स्वर्णिम काल की बात करें तो वैदिक काल में शिक्षा पूर्णतः निशुल्क थी और पूरी तरह से दान से मिले धन से चलती थी । राजा हो या साधारण प्रजा , सबके बच्चे एक ही वातावरण में रहकर साथ पढ़ते थे । राज परिवार हो या सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए अन्य प्रभुत्वशाली लोग, सबके लिए एक ही गुरूकुल थे । शिक्षा के स्तर पर कोई भेद न था ।

लेकिन समय का चक्र सदैव एक सा नहीं रहता I विकसित और विकासशील बनने की दौड़ में हम सब इतने आगे बढ़ते गए कि सभ्यता संस्कृति को पीछे छोड़ते चले गए I विद्यालय ही नहीं शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी सभी में परिवर्तन देखने को मिल रहा है युगों युगों से चला आ रहा गुरु शिष्य का संबंध भी आज इस परिवर्तन की भेंट चढ़ रहा है l 

आज बेशक चाहे अधिकतर शिक्षकों का स्थान तकनीकी गुरु ने ले लिया हो, चाहे आज का विद्यार्थी अपने शिक्षक से अपनी समस्या सांझा नहीं करता हो, भले ही वो गूगल गुरु से पढ़ना और समझना चाहता हो, लेकिन एक शिक्षक के मार्गदर्शन में कक्षा में बैठकर जो पढ़ाई होती है, उसका कोई मुकाबला नहीं है। आज बहुत से ऐसे भी शिक्षक हैं, जो सुविधा – असुविधाओं से प्रभावित हुए बिना मौन साधक की भाँति अपनी पूर्ण क्षमता से बच्चों को पूरे मनोयोग से पढ़ाने में लगे हैं । क्यूंकि शिक्षक न पद है, न पेशा है, शिक्षक सभी धर्मों से ऊंचा धर्म एवं गीता में उपदेशित "मा फलेषु "वाला कर्म है,अर्थात तेरा कर्म करने में अधिकार है इनके फलों में नही I 

ऐसे शिक्षकों का वर्णन इन पंक्तियों से समझा जा सकता है कि एक सामान्य शिक्षक पढ़ाता है, एक औसत शिक्षक समझाता है, एक अच्छा शिक्षक प्रयोग करके दिखाता है, लेकिन एक बेहतरीन शिक्षक वो है जो प्रेरित करता है। शिक्षक ना केवल बच्चे के अन्दर छिपी प्रतिभा को पहचानता है , बल्कि पहचानने के साथ- साथ उसमें निखार भी लाता है, और उसे इतना अधिक प्रेरित कर देता है कि जीवन में आने वाली सभी चुनौतियों का सामना आसानी से कर लेता है । सुसंस्कारों की मजबूत बुनियाद पर टिके ज्ञान से भरे ऊर्जावान व अपने आचरण से प्रेरणा भर देने वाले शिक्षक ही किसी देश की अमूल्य धरोहर होते हैं I

आओ हम सब शिक्षक दिवस पर समस्त शिक्षकों का श्रद्धापूर्वक अभिन्नदन और वंदन करें और ये कामना करें कि, शिक्षकों के सम्मान हेतु समर्पित शिक्षक दिवस महज़ एक पर्व बनकर न रह जाये बल्कि शिक्षकों के आत्मचिंतन एवं आत्ममंथन का भी पर्व हो जिसकी छाया में भारत का स्वर्णिम भविष्य निखर कर दुनिया में जगमगाये और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे शिक्षकों के समर्पण एवं प्रेरणा से भारत शिक्षा के हर क्षेत्र में जगद् गुरु बनकर पूरे विश्व का कल्याण करे।

शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाओं सहित 

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