जिंदगी की इस भागम-भाग में कौन एक अच्छा जीवन नहीं जीना चाहता, परन्तु एक अच्छे जीवन के लिए सबसे जरूरी है बेहतर स्वास्थ्य। स्वस्थ रहने के लिए लोग जिम जाने के लेकर खाने में बहुत तरह की एहतियात बरतते हैं। लोग कभी नहीं चाहते कि वो कुछ बुरा खाकर या आलसी रहकर खुद को बीमार करें, लेकिन इसी बीच वो ये भूल जाते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता अर्थात पर्सनल हाइजीन बहुत जरूरी है। हाइजीन का अर्थ है स्वस्थ रहने का तरीका. यह न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर आपके मन-मस्तिष्क पर पड़ता है I इसकी अनदेखी से जहां एक ओर हमें शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं, वहीं दूसरी ओर हम किसी संक्रामक बीमारी की चपेट में भी आ सकते हैं I हमारे भारतीय संस्कारों में भी सदियों से एक मान्यता है कि जहाँ साफ सफाई होती है वही पर लक्ष्मी का वास होता है। लेकिन यह बात भी सच है कि साफ सफाई का हमारे स्वास्थ्य से भी घनिष्ठ संबंध है। तभी तो जब हम गंदगी के संपर्क में आते है तो उसका सीधा कुप्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए अपनी और अपने घर की साफ सफाई के साथ – साथ हमें अपने आस – पास की साफ सफाई पर भी खास ध्यान देना चाहिए क्यूंकि बिना साफ-सफाई के हम स्वस्थ नहीं रह सकते। जब हम साफ- सुथरे तरीके से नहीं रहेंगे तब हम कोरोना ,हैजा, टाइफाइड, पीलिया, बुखार, खुजली, इन्फेक्शन, एलर्जी, अस्थमा इत्यादि बीमारियों की गिरफ्त में आसानी से आ सकते हैं इसलिए जरूरी है कि हम खुद को साफ रखें। बहुत से लोगों में ये देखा गया है कि वो अपने घर के अंदर स्वच्छता नहीं रखते और ऐसा करने कि बजह से घर में कीटाणु पैदा हो जाते हैं जो बीमारी को दावत देते हैं। घर के अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें, रोज नहाएं और हमेशा खाना खाने से पहले अपने हाथ धोना ना भूलें। अगर हमारे पास पानी उपलब्ध नहीं है तो हम हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर अपने हाथों को साफ कर सकते हैं । इसके अलावा जब भी हम अपने घर पर कहीं बाहर से लौटें तो अपने पैरों और हाथों को जरूर साफ करें। ऐसा करके हम कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं।स्वच्छता के साथ साथ हम जो खाना खा रहे हैं वो हाईजीनिक होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम खाना बनाते वक्त भी स्वच्छता का विशेष ख्याल रखें। बरसात के दिनों में खाने के साथ-साथ आपका पानी भी साफ होना चाहिए। स्वच्छता जरूरी है लेकिन स्वच्छता कायम रखने के लिए हमें कुछ सावधानियां भी रखनी होंगी। खाना बनाते वक्त, किसी को खिलाने से पहले या बाद में हाथों की साफ सफाई जरूरी है। शौच से आने के बाद साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए। कहीं भी पानी को जमा होने नहीं देना चाहिए। अगर कहीं भी घर या बाहर पानी इकट्ठा होता है तो उससे मच्छर पैदा होते हैं। इसलिए कहीं भी अगर पानी रखा है तो आपको सावधानी पूर्वक उसे सहेजने के बारे में सोचना चाहिए सामूहिक जीवन में सफाई आर्थिक सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। समाज के सर्वंगीण हित की दृष्टि से सफाई के बुनियादी तथ्यों तक पहुंचना बेहद जरुरी है। सबसे बड़ी सम्पत्ति आप की सेहत ही है। कहा भी जाता है कि स्वास्थ्य ही धन है और स्वास्थ्य है तो सबकुछ है। इसलिए इस धन को प्राप्त करने के लिए उपर्युक्त साफ – सफाई को नजरअंदाज मत कीजिए साफ-सफाई सिर्फ काम नहीं बल्कि एक संस्कार है। इसलिए अगर हम इसे अपनी आदत में शुमार नहीं करेंगे तो हो सकता है हमें बीमारियां घेर लें। इसलिए जरूरी है कि खुद को साफ रखें और दूसरों को भी स्वच्छ रहने की प्रेरणा l
जैसे की हम जानते ही हैं कि शिक्षा व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए बहुत आवश्यक है। इसलिए ये ज़रूरी है की शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए वक्त के साथ शिक्षा नीति में भी बदलाव किया जाता रहे और कहते हैं कि जीवन बदलाव का नियम है और यदि यह बदलाव सकारात्मक है, तो यह जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। जिस तरह से एक जगह रुका हुआ पानी बदबू मारने लगता है उसी तरह से एक पुरानी पद्धति चाहे वो शिक्षा व्यवस्था से ही सम्बंधित हो, से भी पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है इसी सकारात्मक बदलाव की और अग्रसर होते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करके शिक्षा के नवीनीकरण की ओर पहल की है जो कि निःसंदेह एक सराहनीय कदम है, जो बच्चो के मानसिक विकास को बढ़ावा देगा साथ ही अब यह विषयो को रटने की पद्धिति का त्याग कर उसे समझने के सिद्धांत पर कार्य करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर...
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