विश्व पर्यावरण दिवस वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और उसके विभिन्न घटकों के संरक्षण के लिए आयोजित किया जाने वाला सबसे बड़ा अभियान है, जिसका लक्ष्य पृथ्वी वासियों को पर्यावरण की महत्ता, वातावरण को स्वच्छ बनाना एवं उसके संरक्षण के लिए जागरूक बनाना है। यह हर वर्ष 5 जून को 100 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है, हालाँकि कोरोना वायरस द्वारा प्रकृति पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव एवं बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण लगातार अशुद्ध हो रहा है, ऐसे में आने वाली पीढ़ी के लिए इसे अनुकूल बनाने के संकल्प का दिन है विश्व पर्यावरण दिवस I जिसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से 1972 में हुई थी I इस दिवस पर स्कूल, कॉलेज व अन्य स्थानों पर विभिन्न तरह की पर्यावरण संबंधी गतिविधियां जैसे निबंध, भाषण, क्विज, कला प्रतियोगिता, बैनर प्रदर्शन, नुक्कड़-नाटक, रैली आदि के जरिए लोगों को बृहद रूप से वृक्षारोपण, प्रकृति प्रेम, वृक्ष कटाई से रोकने के लिए जागरूक किया जाता है प्रकृति के प्रति सकारात्मक रवैये को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता हैI साथ ही साथ उन्हें आसपास को साफ सुथरा रखने, पानी की बचत, बिजली का कम उपयोग करने उसके जगह पर सौर उर्जा का उपयोग करने, जंगली जीवन की सुरक्षा आदि के लिए संकल्प भी दिलाया जाता है ताकि हमारी प्राकृतिक सुंदरता सदैव बरकरार रहे विश्व पर्यावरण दिवस 2022 को 'केवल एक पृथ्वी' है, विषय के साथ मनाया जा रहा है, जो ‘प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने’ पर केंद्रित है, क्योंकि यह हमारे ग्रह को संरक्षित करने और पुनर्स्थापित करने के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक, परिवर्तनकारी कार्रवाई का आह्वान करता है प्रकृति ने समस्त जीवों की उत्पत्ति एक ही सिद्धांत के तहत की है जिससे समस्त चर-अचर जीवों के अस्तित्व को एक दूसरे से जोड़ा हुआ है,लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब मनुष्य ने स्वयं को पर्यावरण का हिस्सा ना मानकर उसको अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विकृति करने लगा I इन गतिविधियों ने प्रकृति के रूप को पूरी तरह बिगाड़ दिया फलस्वरूप नदियां, पहाड़, जंगल और जीव पृथ्वी पर चारों तरफ जो नजर आते थे इनकी संख्या घटती गई इनमें से कई तो विलुप्त होने के कगार पर हैं I ऐसा लगता है कि मनुष्य ने प्रकृति के विरुद्ध एक अघोषित युद्ध छेड़ रखा है और स्वयं को प्रकृति से अधिक ताकतवर साबित करने में जुटा हुआ है यह जानते हुए भी कि प्रकृति के विरुद्ध युद्ध में वह जीत कर भी अपना वजूद सुरक्षित नहीं रख पाएंगेI जल और वायु दोनों प्रकृति की देन हैं। प्रकृति इनके बदले हमसे कुछ नहीं लेती । इनका कोई मोल नहीं, इसलिये यह अनमोल हैं। सात महासागरों से लेकर सात महाद्वीपों तक जो भी जीवन है, उसका आधार ऑक्सीजन है, इसीलिये इस गैस से युक्त हवा को कहते हैं प्राणवायु। महासागरों में पनपे आदि जीवन दूतों एक कोशिका वाले नैनो बैक्टीरिया और नन्हें शैवालों ने ही समुद्र के पानी और सूरज की किरणों के योग से कार्बन डाइऑक्साइड के अणुओं-परमाणुओं को खण्ड-खण्ड करके ऑक्सीजन का वह भण्डार तैयार किया , जिसके बलबूते विशालकाय ह्वेल-हाथी और धरती माँ की कोख में मनुष्यों की फसलें लहलहा सकीं । आज यही मनुष्य मेहनत से कमाई प्राकृतिक ऑक्सीजन को फूँक-ताप कर फिर से कार्बन डाइऑक्साइड का गुबार और अम्बार खड़ा करने के अप्राकृतिक कृत्य में तल्लीन और अपने सुखसाधन विस्तार में लीन है।धरती पर जो भी ऑक्सीजन है, वह वनस्पतियों की देन है, इसी तथ्य को ध्यान में रखकर आओ हम सब मिल कर फूलों के बुके की जगह फूलों वाले पौधों से मेहमानों का स्वागत करने और शादी ब्याह, जन्मदिन और सालगिरह जैसे अवसरों पर पेड़-पौधे ही गिफ्ट करें क्यूंकि कि हम जो भी फूल या बुके गिफ्ट करते हैं, वह प्रकृति को नुकसान पहुँचाकर ही करते हैं और कोई भी बुके तीन दिन के बाद सुगन्ध और सौन्दर्य की जगह दुर्गन्ध का प्रतीक बनकर कूड़ेदान में पहुँच जाते हैं, जबकि उससे आधी कीमत का पौधों का गिफ्ट सदैव सुगन्ध और शुद्ध ऑक्सीजन के प्लांट रूप में हमारे घरों के भीतर पहुँचता है। जल, वायु, मिट्टी एवं जंगल जैसे कारक प्रकृति के उपहार हैं जो पृथ्वी पर जीवन के विविध रूपों को पनाह दिए हुए हैं। जीवन के विविध रूपों के सामंजस्य के कारण पृथ्वी का वातावरण अनोखा बना हुआ है।और हमें ईश्वर द्वारा प्रदत्त इस अमूल्य ग्रह के विशिष्ट वातावरण का दिल से सम्मान करना चाहिए यदि हम सब प्रकृति के नियमों का भलीभाँति अनुसरण करें तो आने वाली पीढ़ियों में भी कभी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं में कमी नहीं रहेगी I
जैसे की हम जानते ही हैं कि शिक्षा व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए बहुत आवश्यक है। इसलिए ये ज़रूरी है की शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए वक्त के साथ शिक्षा नीति में भी बदलाव किया जाता रहे और कहते हैं कि जीवन बदलाव का नियम है और यदि यह बदलाव सकारात्मक है, तो यह जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। जिस तरह से एक जगह रुका हुआ पानी बदबू मारने लगता है उसी तरह से एक पुरानी पद्धति चाहे वो शिक्षा व्यवस्था से ही सम्बंधित हो, से भी पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है इसी सकारात्मक बदलाव की और अग्रसर होते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करके शिक्षा के नवीनीकरण की ओर पहल की है जो कि निःसंदेह एक सराहनीय कदम है, जो बच्चो के मानसिक विकास को बढ़ावा देगा साथ ही अब यह विषयो को रटने की पद्धिति का त्याग कर उसे समझने के सिद्धांत पर कार्य करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर...
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