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विश्व तंबाकू निषेध दिवस : स्वस्थ जीवन जीने के लिए तंबाकू का करें परित्याग

नशा भले ही शान और लत के लिए किया जाता हो, पर यह जिंदगी की बेवक्त आने वाली शाम का भी मुख्य कारण है, जो कब जीवन में अंधेरा कर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। आप इसका मजा भले ही दिनभर के कुछ सेकंड के लिए लेते हैं, लेकिन यह मजा, कब आपके लिए जिंदगी भर की सजा बन जाए, आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।धूम्रपान का सेवन करना, स्पष्टतः जीवन को नरक से भी बदत्तर बनाना है। इससे आर्थिक, शारीरिक और सामाजिक आदि हर स्तर पर नुकसान ही नुकसान होता है। एक तरह से धूम्रपान एवं तम्बाकू का सेवन, खुशहाल जीवन का अजेय दुश्मन कहा जा सकता है। यदि विशेषज्ञों की शोध रिपोर्टों का अवलोकन और धूम्रपान एवं तम्बाकू के कुप्रभावों का आकलन किया जाए तो रौंगटे खड़े हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक विश्व में लगभग डेढ़ अरब लोग धूम्रपान करते हैं और लगभग 50 लाख लोग प्रतिवर्ष धूम्रपान के घातक प्रभावों के कारण अकाल मौत के शिकार हो जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन धूम्रपान करने वालों के सम्पर्क में रहने के कारण प्रतिवर्ष धूम्रपान न करने वाले 6 लाख अतिरिक्त व्यक्ति भी काल की भेंट चढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक तम्बाकू सेवन से होने वाली मृत्यु की संख्या बढ़कर 80 लाख प्रतिवर्ष हो जाएगी।  विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 18 लाख लोग तम्बाकू और सिगरेट के सेवन करने से होती हैं

एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में लगभग 36 प्रतिशत लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें 20.3 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है। विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान पुरूषों की तुलना में महिलाओं को त्वचा का कैंसर, गले का कैंसर और इसी तरह की घातक बीमारियां अधिक होती हैं। धूम्रपान करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए तो धूम्रपान और भी घातक होता है। इससे गर्भपात का भयंकर खतरा बना रहता है। धूम्रपान से समय से पहले बच्चा पैदा हो सकता है और बच्चे के अन्दर रक्त कैंसर की संभावनाएं भी प्रबल रहती हैं।  यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि विश्व में हर 8 सेकिण्ड में धूम्रपान की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो रही है। भारत में 20 करोड़ लोग धूम्रपान की चंगुल में हैं। देश में धूम्रपान के कारण 50 प्रतिशत पुरूष और 20 प्रतिशत महिला कैंसर का शिकार हैं। 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर, 90 प्रतिशत फेफड़े का कैंसर और 77 प्रतिशत नली का कैंसर धूम्रपान सेवन करने से हुआ है। 45 लाख लोग दिल की बीमारी से ग्रसित हैं।  इससे न केवल उम्र कम होती है, बल्कि शेष जीवन अनेक प्रकार के रोगों एवं व्याधियों से ग्रसित हो जाता है। भारत में किए गए अनुसन्धानों से पता चला है कि गालों में होने वाले कैंसर का प्रधान कारण खैनी अथवा जीभ के नीचे रखनी जाने वाली, चबाने वाली तंबाकू है। इसी प्रकार ऊपरी भाग में, जीभ में और पीठ में होने वाला कैंसर बीड़ी पीने के कारण होता है। सिगरेट गले के निचले भाग में कैंसर करती है और अंतड़ियों के कैंसर की भी संभावना पैदा कर देती है। 2 अक्तूबर, 2008 को गाँधी जयन्ती से पूरे देशभर में  केन्द्र सरकार ने ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ से संबंधित नियम संशोधित करके पूर्णत लागू कर दिया गया था। इन संशोधित नियमों के अन्तर्गत धूम्रपान सभी सार्वजनिक स्थानों पर सख्ती से निषिद्ध है। ‘सार्वजनिक स्थलों’ में आडिटोरियम, अस्पताल भवन, स्वास्थ्य स्थान, मनोरंजन केन्द्र, रेस्टोरेंट, सार्वजनिक कार्यालय, न्यायालय भवन, शिक्षण संस्थान, पुस्तकालय, सार्वजनिक यातायात स्थल, स्टेडियम, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, कार्यशाला, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल  डिस्को, कॉफी हाऊस, बार, एयरपोर्ट लॉज आदि शामिल किए गए हैं। इस एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति उल्लंखन करेगा उस पर 200 रूपये के आर्थिक दण्ड के साथ दंडात्मक कार्यवाही करने का प्रावधान किया गया है। निश्चित तौरपर इस तरह के कानून की देश में सख्त आवश्यकता थी। भारत सरकार ने 18 मई, 2003 को तम्बाकू नियन्त्रण कानून का निर्माण किया था। मई, 2004 में देश में पहली बार धूम्रपान पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इस प्रतिबंध के नियमों में मई, 2005 में संशोधन किया गया। वैसे तम्बाकू सेवन पर रोक लगाने के मामले में भारत का हमेशा अग्रणीय स्थान रहा है।  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि ‘‘अब तक मैं यह न समझ पाया कि तंबाकू पीने का इतना जबरदस्त शौक लोगों को क्यों है? नशा हमारे धन को ही नष्ट नहीं करता, वरन स्वास्थ्य और परलोक को भी बिगाड़ता है।’’ कुल मिलाकर धूम्रपान से स्वास्थ्य, आयु, धन, चैन, चरित्र, विश्वास और आत्मबल खो जाता है और इसके विपरीत दमा, कैंसर, हृदय के रोग, विविध बीमारियों का आगमन हो जाता है।तंबाकू और धूम्रपान के इन्हीं दुष्परिणामों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा  31 मई को प्रतिवर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में  मनाया जाता है। इस वर्ष  का विषय "पर्यावरण की रक्षा करें" है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे तम्बाकू पृथ्वी को प्रदूषित करता है और अपने पूरे जीवन चक्र में लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है। वार्षिक अभियान घातक और हानिकारक तंबाकू के उपयोग और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क के नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और किसी भी रूप में तंबाकू के उपयोग को रोकने का एक मौका है।

यदि हमें एक स्वस्थ एवं खुशहाल जिन्दगी हासिल करनी है तो हमें तंबाकू का प्रयोग करना हर हालत मेें छोड़ना ही होगा। ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है। तंबाकू का प्रयोग दृढ़ निश्चय करके ही छोड़ा जा सकता है।

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