हमारा देश ऋषि मुनियों और संतों का देश है जिन्होंने लोगों को कल्याण का मार्ग दिखाया। होली हो या दिवाली अथवा महापुरुषों की जयंती या कोई अंतर्राष्ट्रीय दिवस सब का निचोड़ एक ही है जिओ और जीने दो। वैसे तो ऐसे कई तरीके हैं जिससे हम अकेले या सामूहिक तौर पर पृथ्वी को बचने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं और इसके लिए हमें हर दिन पृथ्वी दिवस मनाते हुए इसके सरंक्षण के लिए कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए ताकि पृथ्वी साफ सुथरी हो और मानव सुखपूर्वक पृथ्वी पर अपना जीवन यापन कर सके। हमारे लिए यह पृथ्वी ही भगवान है क्यूंकि प्रत्येक जीव धरती माता पर ही निर्भर है। ये धरती माता ही हैं, जो हमें अन्न, जल, फल-फूल, पेड़-पौधे, पहाड़, नदियां, झरने का सुख देती हैं। धरती की कृपा से ही जीवों का जीवन चलता है। यही कारण है कि हम हजारों साल से धरती माता की पूजा करते आ रहे हैं । पृथ्वी संरक्षित होगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित होगा। लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से प्रथमतः पूरे विश्व में 22 अप्रैल 1970 को पृथ्वी दिवस मनाया गया। पर अब ऐसा लगता है कि पृथ्वी दिवस महज औपचारिकता ही रह गया है क्यूंकि ग्लोबल वार्मिंग के रूप में जो आपदाएँ आज हमारे सामने हैं,अगर ये ऐसे ही होती रहीं तो वह दिन दूर नहीं जब पृथ्वी से जीव−जन्तु व वनस्पति का अस्तिव ही समाप्त हो जाएगा। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाके चपेट में आ जाएंगे। पृथ्वी बहुत व्यापक शब्द है जिसमें जल, हरियाली, वन्यप्राणी, प्रदूषण और इससे जुड़े अन्य कारक भी हैं। धरती को बचाने का आशय है इसकी रक्षा के लिए पहल करना। इसलिए इन प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए पर्यावरण संरक्षण पर जोर देने की अवश्यकता है। जन्म लेने से मृत्यु तक हम इसी पृथ्वी की गोद में रहते हैं। वर्तमान समय में पृथ्वी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती जनसंख्या की है। धरती की कुल आबादी आज आठ अरब के करीब पहुंच चुकी है। बढ़ती आबादी, उपलब्ध संसाधनों पर नकारात्मक दबाव डालती है, जिससे पृथ्वी की नैसर्गिकता प्रभावित होती है। बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पृथ्वी के शोषण की सीमा आज चरम पर पहुंच चुकी है। जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम से कम करना दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। आज हमारी धरती अपना प्राकृतिक रूप खोती जा रही है। विश्व में बढ़ती जनसंख्या तथा औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में तेजी से वृद्धि के साथ−साथ ठोस अपशिष्ट पदार्थों द्वारा उत्पन्न पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी विकराल होती जा रही है। आज विश्व भर में हर जगह प्रकृति का दोहन जारी है कहीं फैक्ट्रियों का गन्दा जल हमारे पीने के पानी में मिलाया जा रहा है तो कहीं गाड़ियों से निकलता धुआं हमारे जीवन में जहर घोल रहा है और घूम फिर कर यह हमारी पृथ्वी को दूषित बनाता है अगर हमें पृथ्वी को बचाना है तो हमें कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर ध्यान केंद्रित करना होगा। प्रकृति में हो रहे बदलाव के चलते हमारी आने वाली पीढ़ी घर के आंगन में चहचहाने वाली चिड़िया , फूलों पर मंडराती रंग-बिंरगी तितली और भंवरें,मधुमक्खी, चींटियां और चीता जैसी कई प्रजातियों के बारे में भी किताबों में पढ़कर ही जानेगी । दिनोंदिन धरती के तापमान में वृद्धि हो रही है, हिमखंड तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, इससे समूची प्रकृति के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। प्रकृति की संरचना में की जा रही छेड़छाड़ के चलते वायुमंडल में गैसों का संतुलन बिगड़ गया है। इससे फसल चक्र गड़बड़ाया है, धरती की उर्वरता कम हुई। सबसे चिंता का विषय है कि पारिस्थितिकी चक्र गड़बड़ा गया है, जिस कारण जैव विविधता पर संकट खड़ा हो गया है। आज दुनिया भर में हजारों किस्म के पक्षी, स्तनधारी और कीट-पतंगे या तो विलुप्त हो चुके हैं या फिर विलुप्त होने की कगार पर हैं।
इस वर्ष पृथ्वी दिवस की थीम 'इन्वेस्ट इन अवर प्लैनेट' है, जो हमें हरित
समृद्धि से समृद्ध जीवन बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है. यह थीम संदेश देती है
कि हमारे स्वास्थ्य, हमारे परिवारों, हमारी आजीविका और हमारी धरती को एक साथ संरक्षित
करने का समय आ गया है I मात्र दिवस मनाने से जागरूकता
नहीं बढ़ेगी ।इसके लिए हमें इस विश्व
पृथ्वी दिवस पर संकल्प लेना होगा कि हम
पृथ्वी और उसके वातावरण को बचाने का प्रयास करेंगे। हम पर्यावरण के प्रति न सिर्फ
जागरूक हों, बल्कि
उसके लिए कुछ करें भी। पृथ्वी को संकट से बचाने के लिए स्वयं अपनी ओर से हमें
शुरूआत करनी होगी । पानी को नष्ट होने से बचाना होगा । वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा
। अपने परिवेश को साफ−स्वच्छ रखना पड़ेगा । पृथ्वी के सभी तत्वों को संरक्षण देने
का संकल्प लेना होगा और अपनी वयस्तता के बाबजूद भी यदि इस विशेष दिवस पर अपना थोडा
सा योगदान दें तो धरती माँ के क़र्ज़ को उतारा जा सकता है तथा हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रकिया
जा सकता है I
रजनीश
Very Nice Sir
ReplyDelete