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युद्ध त्रासदी एक वैज्ञानिक अभिशाप

 सालों से एक प्रश्न मुंह बाये खड़ा है कि विज्ञान एक वरदान है या अभिशाप? कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है और विज्ञान है उसका मार्ग I विज्ञान एक शक्ति है जो नित नए अविष्कार करती है, यह शक्ति ना तो अच्छी है ना बुरी l अगर हम उस शक्ति से मानव कल्याण के कार्य करें तो यह वरदान प्रतीत होती है अगर उसी से विनाश करना शुरू कर दें तो यह अभिशाप बन जाती है बेशक विज्ञान के अविष्कार सुख-सुविधा-सुरक्षा देते है,लेकिन इसके दुष्परिणाम बहुत डरवाने हो सकते है और इसका जीता जागता उदाहरण युक्रेन और रूस के बीच चल रहा भीषण युद्ध है जिसने इसी विज्ञानं की उन्नति से लाखों लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया I आज युद्ध के ग्यारहवें दिन स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, शहर, शॉपिंग माल सब कुछ तबाह हो चुका है l वैज्ञानिकों का यह मानना है कि आज  दुनिया में अणु बम, परमाणु बम और  अन्य भयानक  शस्त्रों की इतनी विनाशकारी सामग्री  इकट्ठी   हो चुकी है कि उससे सारी पृथ्वी को अनेक बार नष्ट किया जा सकता है। वास्तविक रूप में यदि हम विज्ञान से होने वाले लाभ और हानियों का अवलोकन करें तो हम देखते हैं कि विज्ञान का सदुपयोग व दुरुपयोग मनुष्य के हाथ में है । यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह इसे किस रूप में लेता है । उदाहरण के तौर पर यदि नाभिकीय ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो यह मनुष्य को ऊर्जा प्रदान करता है जिसे विद्युत उत्पादन जैसे उपभोगों में लिया जा सकता है ।परंतु दूसरी ओर यदि इसका गलत उपयोग हो तो यह अत्यंत विनाशकारी हो सकता है और जिस दिशा में यह युद्ध आगे बढ़ रहा है उससे तो यही प्रतीत होता है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर अग्रसर है जोकि सम्पूर्ण  मानव जाति के लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है l स्विट्जरलैंड की एक संस्था इंटरनेशनल कैंपेन टू अबॉलिश न्यूक्लियर वेपन के मुताबिक, एक परमाणु बम पूरा शहर तबाह कर देगा l अगर आज के समय में कई सारे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होता है तो इसमें करोड़ों लोग मारे जाएंगे. वहीं, अगर अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध छिड़ गया तो मरनेवालों की संख्या 10 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी. यदि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध में 500 परमाणु बम का इस्तेमाल हो जाता है तो आधे घंटे के अंदर 10 करोड़ से ज्यादा की मौत हो जाएगी l इतना ही नहीं, किसी युद्ध में अगर दुनिया में मौजूद 1% से भी कम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होता है तो इससे भी 2 अरब लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे l साथ ही पूरा हेल्थ सिस्टम भी तबाह हो जाएगा, जिससे घायलों को इलाज भी नहीं मिल सकेगा I यदि परमाणु युद्ध हुआ तो इसका सीधा प्रभाव धरती के तापमान पर पड़ेगा क्योंकि इन हमलों से 150 मिलियन टन धुंआ धरती के स्ट्रेटोस्फेयर में जम जाएगा l अनुमान है कि ऐसा होने पर कम से कम 10% जगहों पर सूरज की रोशनी नहीं पहुंचेगी वहीं, दुनियाभर के ज्यादातर इलाकों में बारिश भी नहीं होगी l ग्लोबल रेनफॉल में 45% की कमी आ जाएगी और इससे धरती की सतह का औसत तापमान -7 से 8डिग्री सेल्सियस पहुंच जाएगा. इसकी तुलना करें तो  दुनिया 18 हजार साल पीछे चली जाएगी Iअंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति शोध संस्थान (सिपरी) का अनुमान है कि 2021 की शुरुआत में दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या 13,865 थी. इस आंकड़े में उन सभी हथियारों को गिना गया है जिन्हें तैनात किया गया है या फिर डिस्मेंटल किया जाना है और अगर इस बार गलती से भी इनका इस्तेमाल हो गया तो कई देश नक्शे से ही मिट जायेंगे I ऐसे ही भूल अमेरिका ने 77 साल पहले जापान के हिरोशिमा व नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिरा कर की थी। इनसे दोनों शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गए थे। पलभर में  डेढ लाख से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। जो जिंदा बचे वे अपंगता के शिकार हो गए। दोनों शहरों में दूर-दूर तक के इलाकों में घंटों तक काली बारिश होती रही। रेडियोएक्टिव विकिरण ने इन जिंदादिल शहरों को लाशों के ढेर में बदल दिया था। आज फिर से हमें इस भयानक त्रासदी से सीख लेने की आवश्यकता है ताकि अब कोई भी इस तरह से परमाणु बम का गलत इस्तेमाल न कर सके और पूरे  विश्व में शांति स्थापित हो तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए विज्ञान केवल वरदान साबित हो ना कि अभिशाप l 

रजनीश रांगड़ा

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