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सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा -बच्चों के लिये सड़क सुरक्षा ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण

हर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में कहीं न कहीं आने जाने के लिए सड़क का उपयोग अवश्य करता है। आज के व्यस्त जीवन में सब एक दूसरे से जल्दी अपनी मंजिल पर पहुँचना चाहते है जिससे कि रोज बहुत सी दुर्घटनाएँ घटित होती हैं। सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति को चोट लगने या मृत्यु होने का खतरा बना होता है । आधुनिक युग में सड़क दुर्घटना आम सी बात हो गई है। सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी, तेज़ गति में गाडी चलाना, नशे में ड्राइविंग और गलत दिशा में गाड़ी चलाना आदि के कारण सड़क हादसे बढ़ते ही जा रहे है। वाहनों के बढ़ते टकराव की वजह से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है। एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए और अपनी निजी कामो को जल्दी से अंजाम देने के लिए इंसान वाहनों का भरपूर सहारा ले रहा है, जिस वजह से सड़कों पर यातायात की समस्या पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गई है। सड़क यातायात सुरक्षा एक ऐसी विधि है जिसमें नियम बनाकर दुर्घटना को रोका जा सकता है और लोगों को चोट लगने से बचाया जा सकता है। कहा जाता है कि दुर्घटना से देर भली है। हर किसी को सड़क सुरक्षा के नियमों के बारे में पूरी जानकारी होना चाहिए, ख़ासकर बच्चों और युवाओं को सड़क सुरक्षा के नियमों के बारे मे पता होना चाहिये I जब लोग खुद यातायात नियमों की एहमियत समझेंगे और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे तभी सड़क हादसों पर काबू पाया जा सकेगा।सड़क सुरक्षा के उद्देश्यों कि पूर्ति के लिये सबसे महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक व्यक्ति रक्षात्मक चालन कोर्स करे। किसी भी गंभीर परिस्तिथि में या विभिन्न दुर्घटनाओं के बाद खुद स्थिति को संभालने का तरीका सभी को जरूर पता होना चाहिए। इस के लिए स्कूलो तथा कॉलेजो में ही बच्चो को सड़क सुरक्षा उपायों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। अगर विद्यार्थी को पहले से ही सभी सड़क सुरक्षा नियमो तथा इस विषय की पूरी जानकारी होगी तो होने वाले सड़क हादसों के आंकड़ों में बहुत सुधार आएगा, क्योकि ज्यादातर सड़क हादसे कम उम्र के लोग और नियमो की जानकारी न होने के कारण होते है।  

सड़क हादसों से सम्बंधित सभी ज्यादातर आंकड़े ये दर्शाते हैं कि सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटना मामलों में बच्चे शामिल होते हैं, क्योंकि वो दूसरे आयु वर्ग के समूह से ज्यादा खतरे पर होते हैं। उन्हें अपने शुरुआती समय से ही सड़क सुरक्षा ज्ञान और शिक्षा की जरुरत है। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने एक अच्छी पहल की है जिसके अंतर्गत  अब हर पाठशाला में रोड सेफ्टी क्लब स्थापित किए जा रहे हैं  अब हर स्कूल में एक नोडल अधिकारी और एक मास्टर ट्रेनर रहेगा जो कि अपने ज्ञानवर्धक बातों से बच्चों को आए दिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक करेंगे  और इसके सही क्रियान्वन हेतु वितीय सहायता राशि स्कूलों को  जारी भी कर दी है परंतु कहीं ऐसा ना हो कि यह ग्रांट  सिर्फ सामान खरीदने तक ही सीमित रह जाए I बच्चों के लिए सेमिनार, जागरूकता अभियान के तहत पेंटिंग, स्लोगन राइटिंग और उन्हें ट्रैफिक नियमों पर  प्रैक्टिकल ज्ञान प्रदान किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को इन सड़क हादसों से सुरक्षित रखा जा सके I सड़क सुरक्षा पर स्कूलों में शिक्षा देने और पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर परिवहन विभाग ने शिक्षा बोर्ड धर्मशाला को जो प्रस्ताव भेजा था उसे  भी  बोर्ड ने मंजूरी दे दी है और इसके बाद डाइट में पाठ्यक्रम को बनाए जाने का काम भी शुरू कर दिया है। वहीं जैसे ही यह पाठ्यक्रम बनकर तैयार होगा। इसके बाद स्कूलों में बच्चों को यह पाठयक्रम लागू कर दिया जाएगा। इस पाठ्यक्रम के तहत स्कूल में 8 से 12वीं तक के बच्चों को सड़क सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी, जिसमें माह में एक से दो पीरियड बच्चों के लिए लगाए जाएंगे, जिसमें सड़क हादसों के कारणों व यातायात के नियमों के बारे में बच्चों को पढ़ाया जाएगा। प्रदेश में होने वाले हादसों में हुई मौतों में सबसे अधिक मौतों का आंकड़ा 18 से 30 वर्ष के आयु वर्ग का है। ऐसे में पाठ्यक्रम में 10वीं, 11वीं व 12वीं के बच्चों को वाहन चलाने के नियमों के बारे में अधिक जानकारी दी जाएगी क्योंकि वाहन चलाने की इच्छा सभी युवाओं में होती है और अक्सर जोश में होश खोकर अपनी जान गंवा बैठते हैं। यदि युवा छोटी कक्षाओं में ही वाहन चलाने को लेकर जागरूक होंगे तो वह अपना संयम नहीं खोएंगे और एक बेहतर चालक बनेंगे।

एनसीआरबी के आंकड़ों का अगर हम विश्लेषण करें तो पाते हैं कि देश में हर घंटे 18 लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं जबकि 48 दुर्घटनाएं हर 60 मिनट में हो रही है. ये  आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ओवर स्पीडिंग का रोमांच मौत का सौदा बन रहा है और जरूरत है कि अभिभावक भी अपने बच्चों से यातायात के नियमों का पालन करवाने के लिए मार्गदर्शन करें  सभी को सख्ती से सड़क यातायात लाईटों के सभी नियमों, नियंत्रकों और चिन्हों का अनुसरण करना चाहिये। स्कूल में शिक्षकों के द्वारा उचित शिक्षा पाने और घर पर अपने अभिवावकों से बच्चों को सही ज्ञान के द्वारा सड़क सुरक्षा के बारे में अच्छे से अभयस्त होना चाहिये। अभिवावकों को अपने बच्चों को अतिरिक्त सावधान बनाना चाहिये और सड़क को पार करने से पहले बाँये और दाँये देखने के बारे में सिखाना चाहिये। सड़क पर साईकिल चलाने के दौरान बच्चों को ईयरफोन या गाना सुनने का कोई दूसरा यंत्र नहीं प्रयोग करना चाहिये।कार चलाने के दौरान सीट-बेल्ट या बाईक चलाने के दौरान हेलमेट पहनने के लिये अभिवावक को उन्हें सिखाना चाहिये। एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करने के लिये गाड़ी चलाने के दौरान अभिवावकों को सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का अनुसरण करना चाहिये क्योंकि अपने बच्चों के जीवन में माता-पिता ही पहला उदाहरण किसी कार्य को सीखने के लिये बनते हैं। सड़क पर रंगों के मायने (लाल अर्थात् रुको, हरा अर्थात् चलो और पीला का भी अर्थ रुकना है), यातायात लाईट की मूल जानकारी और यातायात चिन्हों के महत्व को उन्हें जरुर बताएँ।हालाँकि  हिमाचल प्रदेश में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होते ही सड़क हादसों में भी कमी आना शुरू हो गई है। सख्त नियमों के साथ जुर्माना ज्यादा होने से वाहन चालक यातायात नियमों का पालन करने लगे हैं। ऐसे में अब हादसे भी कम हो गए हैं। दिसंबर 2020 में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया गया है। इसके बाद से लगातार हादसों में कमी दर्ज हुई। हादसों में कमी की वजह से लोगों की जानें भी कम गईं। सड़क हादसों में घायल भी कम हुए और जान-माल की काफी हद तक सुरक्षा भी हुई। सबसे ज्यादा सड़क हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने या फिर गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन सुनते हुए होते हैं। पुलिस का मानना है कि ज्यादा जुर्माने की राशि व पुलिस के जागरुकता अभियान से सड़क हादसे कम हुए हैं। लेकिन क्या हमें  केवल  चालान से बचने के लिए सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए  ? नहीं यह सत्य नहीं है हमें  इन नियमों का पालन अपनी और दूसरों कि जिन्दगी को सुरक्षित रखने के लिए करना चाहिए  क्यूंकि हमें जो जिन्दगी मिली है वो बहुत खूबसूरत है और इसे हम इस तरह लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ा सकते I

रजनीश रांगड़ा

सहायक नोडल अधिकारी

आपदा प्रबंधन (शिक्षा विभाग)

हमीरपुर

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