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सर्व-धर्म समभाव की पाठशाला-स्काउटिंग

 हर  साल विश्व भर में 22 फरवरी को विश्व चिंतन दिवस यानी वर्ल्ड थिंकिंग डे मनाया जाता है, यह एक ऐसा दिन है जब स्काउट गाइड दुनिया के सभी देशों में अपनी बहनों और भाइयों के हितों के बारे में सोचते हैं 22 फरवरी को इसलिए चुना गया क्योंकि यह स्काउटिंग और गाइडिंग के संस्थापक और विश्व मुख्य मार्गदर्शक लॉर्ड रॉबर्ट बैडेन पॉवेल और उनकी पत्नी लेडी ओल्वे बैडेन पॉवेल का जन्मदिन था । हालांकि उनके द्वारा लिए गए दृढ़ संकल्प के रूप में स्काउटिंग के जन्म को एक सदी से ऊपर बीत चुकी है लेकिन यह मिशन दुनिया के 216 देशों में अच्छे कामों की खुशबू बिखेर रहा है l बैडेन पॉवेल के जीवन को अगर गौर से समझें तो वे एक सिपाही के साथ साथ एक संत भी थे और इसी कारण वे युद्ध के समय भी घायल सैनिकों का उपचार बेहद अपनत्व से किया करते थे l उनको जानने वाले और उनसे प्रेरणा पाने वाले हमारे स्काउट गाइड पिछली एक सदी से ऐसा ही विनीत स्वभाव बनाए हुए हैं परंतु आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में जहां शिक्षा व्यक्ति के लिए जीवन का एक ऐसा अनिवार्य अंग बन चुकी है वहीं शिक्षा कैसी हो, दिशा क्या हो? यह एक ऐसा यक्ष प्रश्न है जो बच्चों से ज्यादा अभिभावक वर्ग को परेशान करता है l बच्चे को तो केवल बोझ उठाना है बोझ का स्वरूप क्या होगा उसकी मात्रा कितनी होगी कौन से स्कूल में वो जाएगा यह सब मां बाप अपने स्टेटस और आय के आधार पर तय करेंगे l इसलिए अति आवश्यक है यह सोचना कि बच्चे को बच्चा हम कितनी देर रहने दे सकते हैं l इस समय में ही उसके भीतर एक मौलिक सोच पनप सकती है उसके चरित्र का विकास हो सकता है उसमें संस्कार डाले जा सकते हैं l हम सभी जानते हैं कि बच्चों की रुचि सबसे अधिक खेलों में होती है इसी आधार पर पहले कहा जाता था कि खेलोगे, कूदोगे, बनोगे नवाब, पढ़ोगे, लिखोगे तो होंगे खराब पर आज दुर्भाग्यपूर्ण खेलकूद बहुत पीछे छूट गए हैं और पढ़ाई का हौवा इस कदर हावी हो चुका है कि देर रात तक बच्चों के साथ उनके मां-बाप उनका होमवर्क पूरा करते दिखाई देते हैं l यह कौन सी पढ़ाई है और यह हमें किस दिशा की ओर ले कर जाएगी यह एक अत्यंत सोचनीय विषय है मगर जो चीज बच्चों को इस वक्त बचा सकती है उन्हें खेल खेल में एक सुयोग्य नागरिक, आज्ञाकारी, ईमानदार और संस्कारित बना सकती है, उस ओर हमारे सभी शिक्षाविदों का ध्यान जरूर जाना चाहिए l स्काउटिंग एक ऐसा विषय है जो कि हर पाठशाला में हर बच्चे के लिए अनिवार्य होना चाहिए इसके पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं जो सीधे-सीधे बच्चे के विकास से संबंध रखते हैं l स्काउटिंग खेल खेल में सीखने की भावना पर बल देता है और यदि पढ़ाई भी खेल खेल में होगी तो बच्चा इसे कभी बोझ नहीं समझेगा और उसकी रूचि इस ओर बढ़ेगी l स्काउटिंग प्राकृतिक नजारों, प्रकृति की गोद जंगलों, पहाड़ों, नदी, झरनों की कल कल की पृष्ठभूमि को रेखांकित करती है आज यही वह शिक्षा है जिनसे हमारे बच्चे वंचित रहते हैं शहरी बच्चों को यदि छोड़ दें तो ग्रामीण परिवेश में विशेष रुप से सरकारी पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों के लिए तो ये सब मात्र एक सपने के समान है परंतु स्काउटिंग विषय के रूप में लगाए जाने से सहज ही उन्हें भी प्राकृतिक नजारे सुलभ होंगे बल्कि प्रकृति से सामंजस्यता स्थापित कर वे स्वयं को धन्य समझेंगे और अपने पूरे जीवन में मन मस्तिक में इसे संजोए रखेंगे l आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने का सबसे उचित स्थान विद्यालय एवं सबसे उचित समय बच्चों का पढ़ाई का समय होता है स्काउटिंग बच्चों को ऐसा मंच प्रदान करती है जहां उसका सर्वागीण विकास संभव है उसके भीतर की प्रतिभाएं यहां अवसर पाती हैं चाहे व शैक्षिक, सांस्कृतिक, या फिर शारीरिक क्षमताओं को दिखाने की बात हो सभी के लिए स्काउटिंग में अवसर उपलब्ध है स्काउटिंग में कैंप फायर, ट्रैकिंग, हाइकिंग, गांठें लगाना आदि कुछ ऐसी गतिविधियां है जहां विद्यार्थियों की हर प्रतिभा का विकास हो जाता है अतः इसे विषय रूप में लागू किया जा सकता है कई वर्षों से भारतवर्ष में एस यू पी डब्ल्यू अर्थात वर्क एक्सपीरियंस में ग्रेडिंग प्रणाली है जो मात्र एक औपचारिकता ही है और यदि इसके स्थान पर थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों रूपों में स्काउटिंग का प्रवेश करवाया जाए तो ना केवल बच्चे इसका स्वागत करेंगे बल्कि दिल से ग्रहण कर अत्यधिक लाभान्वित होंगे प्रत्येक विद्यालय में स्काउट मास्टर गाइड कैप्टन प्रशिक्षण की व्यवस्था व्यवस्था कर इसे सुचारू रूप में क्रियान्वित किया जा सकता है और निश्चित रूप से इसका लाभ बच्चों को मिलेगा l आओ इस चिंतन दिवस पर रॉबर्ट बैडेन-पॉवेल 

के इस कथन कि स्काउटिंग में शिक्षा का तरीका यह है कि लड़के में अपने लिए सीखने की इच्छा पैदा की जाए को अम्ल में लाएं और एक खुशहाल समाज की स्थापना करें l

रजनीश रांगड़ा

जिला आयुक्त (स्काउट)

जिला हमीरपुर

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